दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा के बाद श्रीसूक्त का पाठ करने की परंपरा है। अक्सर इसे 16 ऋचाओं का सूक्त कहा जाता है, जबकि सूक्त की 16वीं ऋचा खुद कहती है कि यह पंचदशर्च यानी 15 ऋचाओं वाला सूक्त है।

पंचांग गणना के स्रोतों में भी कहा गया है कि दिवाली पूजा के बाद श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त और लक्ष्मी की दूसरी स्तुतियों का पाठ करें और हो सके तो रात भर जागरण करें।

आज जानेंगे कि-

  • श्रीसूक्त क्या है और कहां से आया?
  • 15 और 16 ऋचाओं का फर्क क्या है?
  • कमलगट्टे से हवन की परंपरा क्या है?
पूजा के लिए रखे कमल के फूल
पूजा के लिए रखे कमल के फूल फोटो साभार Wikimedia Commons / Thachan.makan, CC BY-SA 3.0

सवाल- श्रीसूक्त क्या है?

जवाब- श्रीसूक्त देवी लक्ष्मी की वैदिक स्तुति है। यह ऋग्वेद के खिल भाग में मिलता है, जिसे आमतौर पर पांचवें मंडल के साथ जोड़ा जाता है। इसकी पहली ऋचा है, हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ इसमें अग्नि देव से सोने जैसी आभा वाली लक्ष्मी को बुलाने की प्रार्थना है।

सवाल- तो 15 ऋचाएं हैं या 16?

जवाब- मूल स्तुति 15 ऋचाओं की है। 16वीं ऋचा फलश्रुति है, यानी पाठ का तरीका और फल बताती है। वह ऋचा है, यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥ इसका भाव है कि जो पवित्र होकर रोज घी की आहुति दे और इन 15 ऋचाओं का लगातार जप करे, उसकी श्री की कामना पूरी होती है। इसलिए पाठ में 16 ऋचाएं गिनी जाती हैं।

श्रीसूक्त की गिनती
15 + 1
15 ऋचाओं की स्तुति और 16वीं फलश्रुति
घर में लक्ष्मी पूजन
घर में लक्ष्मी पूजन फोटो साभार Wikimedia Commons / Harshada raut, CC BY-SA 4.0

सवाल- श्रीसूक्त में कमल का इतना जिक्र क्यों है?

जवाब- श्रीसूक्त में लक्ष्मी को कमल पर बैठी और कमल के रंग वाली बताया गया है। चौथी ऋचा में पद्मे स्थितां पद्मवर्णां कहा गया है। इसी वजह से लक्ष्मी पूजा में कमल का फूल और कमल के बीज यानी कमलगट्टे का खास स्थान माना जाता है।

सवाल- कमलगट्टे से हवन की परंपरा क्या है?

जवाब- 16वीं ऋचा में घी की आहुति की बात है। कई परिवारों और आचार्य परंपराओं में श्रीसूक्त के हर पाठ के साथ घी में डुबोकर कमलगट्टे की आहुति दी जाती है, कहीं 108 कमलगट्टे से हवन होता है। यह क्षेत्र और परिवार की परंपरा है, हर जगह एक जैसा नियम नहीं है। हवन करना हो तो अपने कुल पुरोहित या जानकार से विधि पूछ लें।

कमल के फल और बीज यानी कमलगट्टे
कमल के फल और बीज यानी कमलगट्टे फोटो साभार Wikimedia Commons / Basile Morin, CC BY 4.0

सवाल- दिवाली की रात श्रीसूक्त का पाठ कैसे करें?

जवाब- परंपरा में अपनाया जाने वाला सरल तरीका स्टेप में समझिए…

  • 1. लक्ष्मी पूजा पूरी होने के बाद पूजा स्थान पर ही बैठें।
  • 2. अखंड दीपक जलता रहे, इसका ध्यान रखें।
  • 3. 15 ऋचाओं का पाठ करें, आखिर में फलश्रुति की 16वीं ऋचा पढ़ें।
  • 4. संस्कृत कठिन लगे तो किसी भरोसेमंद किताब से अर्थ के साथ पढ़ें।
  • 5. हवन करना हो तो सुरक्षित जगह पर, पानी पास रखकर करें।

भोपाल में 8 नवंबर को महानिशीथ काल रात 11:39 से 12:30 बजे तक है। कई परिवार इसी समय में पाठ या जप करते हैं।

पूजा और हवन कुंड
पूजा और हवन कुंड फोटो साभार Wikimedia Commons / Yugaljoshi, CC BY-SA 4.0
श्रीसूक्त पाठ की तैयारी

जो तैयारी हो गई, उस पर टिक कीजिए…

क्विज, श्रीसूक्त को कितना जानते हैं?

सवाल पढ़िए, जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…

1. श्रीसूक्त किस वेद के खिल भाग में मिलता है?

सही जवाब- ऋग्वेद।

2. मूल स्तुति में कितनी ऋचाएं हैं?

सही जवाब- 15 ऋचाएं, 16वीं फलश्रुति है।

3. 16वीं ऋचा में किसकी आहुति की बात है?

सही जवाब- घी की।

4. कमलगट्टा क्या है?

सही जवाब- कमल का बीज।

क्या आपके घर में दिवाली की रात श्रीसूक्त का पाठ होता है? कमेंट में बताइए

अपना जवाब नीचे कमेंट में लिखिए और यह जानकारी परिवार के WhatsApp ग्रुप में भेजिए।

WhatsApp पर शेयर करें

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।

कुछ कॉमन सवाल जवाब

श्रीसूक्त में कितनी ऋचाएं हैं?

15 ऋचाओं की स्तुति और 16वीं फलश्रुति।

दिवाली पर श्रीसूक्त कब पढ़ें?

लक्ष्मी पूजा के बाद, कई परिवार महानिशीथ काल में पढ़ते हैं।

क्या कमलगट्टे से हवन जरूरी है?

नहीं, यह परिवार और क्षेत्र की परंपरा है।

श्रीसूक्त की पहली ऋचा क्या है?

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।

स्रोत, पंचांग गणना के स्रोत (Drik Panchang, श्री महालक्ष्मी सूक्तम् पाठ और अर्थ, दिवाली पूजा विधि पेज), Wikipedia (Sri Sukta)। कमलगट्टे से हवन प्रचलित पारिवारिक परंपरा के रूप में। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / Thachan.makan, CC BY-SA 3.0।