इस साल दिवाली की तारीख को लेकर लोगों में उलझन है। कोई 8 नवंबर बता रहा है तो कोई 9 नवंबर, क्योंकि अमावस्या तिथि दोनों दिन पड़ रही है।

भोपाल की पंचांग गणना साफ कहती है कि लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर रविवार की शाम होगी। धनतेरस 6 नवंबर को है और भाई दूज 11 नवंबर को। यानी दीपोत्सव 6 दिन का रहेगा, और एक दिन पहले 5 नवंबर को गोवत्स द्वादशी भी है।

आज जानेंगे कि-

  • दिवाली 9 नहीं, 8 नवंबर को ही क्यों है?
  • धनतेरस से भाई दूज तक किस दिन कौन सा त्योहार है?
  • हर दिन की तिथि और मुख्य मुहूर्त क्या हैं?

सवाल- दिवाली 8 नवंबर को है या 9 नवंबर को?

जवाब- पंचांग गणना के अनुसार दिवाली यानी लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर रविवार को है। कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे खत्म होगी।

लक्ष्मी पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। पंचांग का नियम है कि जिस दिन प्रदोष काल में अमावस्या रहे, उसी दिन दिवाली पूजा होती है। 8 नवंबर की शाम अमावस्या रहेगी, जबकि 9 नवंबर को अमावस्या दोपहर में ही खत्म हो जाएगी। इसलिए 9 नवंबर की शाम पूजा का योग नहीं बनता।

ऐसे तय हुई 8 नवंबर की तारीख, तिथि निर्णय के 5 स्टेप

पंचांग गणना के स्रोतों के मुताबिक धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु और व्रतराज जैसे ग्रंथ दिवाली पर लक्ष्मी पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करने को कहते हैं, जब अमावस्या तिथि चल रही हो। इस साल की तारीख इसी नियम से ऐसे निकली…

  • 1. महीना और तिथि. दिवाली कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यही अमावस्या कार्तिक की और दक्षिण के अमांत पंचांग में आश्विन की कहलाती है।
  • 2. तिथि कब से कब तक. अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे खत्म होगी। यानी तिथि दो तारीखों में बंटी है।
  • 3. प्रदोष काल की जांच. भोपाल में 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:38 से 8:13 बजे तक है और इस पूरे समय अमावस्या रहेगी। 9 नवंबर को अमावस्या सूर्यास्त से पहले ही खत्म हो जाएगी, इसलिए उस शाम प्रदोष में अमावस्या नहीं मिलती।
  • 4. ग्रंथों का नियम. अगर अमावस्या सूर्यास्त से पहले खत्म हो रही हो, तो लक्ष्मी पूजा उससे पहले वाले दिन होती है, जिस दिन सूर्यास्त के बाद अमावस्या रहे। इस नियम से भी तारीख 8 नवंबर ही बनती है।
  • 5. उसी शाम स्थिर लग्न. आखिर में देखा जाता है कि प्रदोष काल के भीतर स्थिर लग्न कब है। 8 नवंबर को वृषभ लग्न शाम 6:02 से 8:01 बजे तक है, इसलिए यही मुख्य मुहूर्त है।

काली पूजा का नियम अलग है। उसमें वह दिन लिया जाता है जिस रात आधी रात के समय अमावस्या रहे। इस बार 8 नवंबर की आधी रात भी अमावस्या है, इसलिए काली पूजा और लक्ष्मी पूजा दोनों एक ही दिन हैं।

सवाल- धनतेरस से भाई दूज तक पूरा कैलेंडर क्या है?

जवाब- भोपाल की पंचांग गणना के मुताबिक दीपोत्सव के दिन इस तरह हैं। नीचे टेबल में देखिए…

तारीखपर्वमुख्य समय (भोपाल)
5 नवंबर, गुरुवारगोवत्स द्वादशीप्रदोष मुहूर्त शाम 5:40 से 8:14 बजे
6 नवंबर, शुक्रवारधनतेरस, यम दीपदानपूजा मुहूर्त शाम 6:10 से 8:08 बजे
7 नवंबर, शनिवारकाली चौदस, हनुमान पूजाहनुमान पूजा रात 11:39 से 12:30 बजे
8 नवंबर, रविवारनरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजालक्ष्मी पूजा शाम 6:02 से 8:01 बजे
9 नवंबर, सोमवारदिवाली स्नान, देव पूजाअमावस्या दोपहर 12:31 बजे तक
10 नवंबर, मंगलवारगोवर्धन पूजा, अन्नकूटप्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:31 से 8:44 बजे
11 नवंबर, बुधवारभाई दूज, चित्रगुप्त पूजाअपराह्न समय दोपहर 1:11 से 3:24 बजे

सवाल- इस बार छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन क्यों?

जवाब- चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे से 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे तक है। 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी रहेगी, इसलिए पंचांग गणना में नरक चतुर्दशी इसी दिन है। शाम को अमावस्या लग जाने से लक्ष्मी पूजा भी इसी दिन होगी।

7 नवंबर की रात चतुर्दशी रहने से काली चौदस और हनुमान पूजा 7 नवंबर को मानी गई है। यह परंपरा गुजरात समेत कुछ इलाकों में ज्यादा है।

दिवाली पर दीयों के साथ सजी रंगोली
दिवाली पर दीयों के साथ सजी रंगोली फोटो साभार Wikimedia Commons / Subharnab Majumdar, CC BY 2.0

सवाल- 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

जवाब- भोपाल में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 से 8:01 बजे तक है, यानी करीब 1 घंटा 58 मिनट। इस समय प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न दोनों रहेंगे। प्रदोष काल शाम 5:38 से 8:13 बजे तक है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, 8 नवंबर, भोपाल
शाम 6:02 से 8:01 बजे
कुल अवधि 1 घंटा 58 मिनट, प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न
कालसमय (भोपाल)
प्रदोष कालशाम 5:38 से 8:13 बजे
वृषभ लग्नशाम 6:02 से 8:01 बजे
महानिशीथ कालरात 11:39 से 12:30 बजे
अमावस्या शुरू8 नवंबर सुबह 11:27 बजे
अमावस्या खत्म9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे

सवाल- स्थिर लग्न में पूजा को इतना अहम क्यों माना जाता है?

जवाब- ज्योतिष में दिन-रात के 24 घंटों में 12 लग्न आते हैं। इन्हें चर, स्थिर और द्विस्वभाव, तीन तरह का माना गया है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर लग्न हैं। स्थिर का मतलब है जो अपनी जगह से न हटे।

मान्यता है कि लक्ष्मी चंचल हैं और एक जगह ज्यादा देर नहीं ठहरतीं। इसलिए स्थिर लग्न में पूजा करने की परंपरा है, ताकि घर में लक्ष्मी का वास स्थिर रहे। पंचांग गणना के स्रोतों के अनुसार ज्यादातर ज्योतिषी इसी पर सहमत हैं। ग्रंथों में मूल नियम प्रदोष और अमावस्या का है, लग्न का नियम बाद में ज्योतिषीय गणना से जुड़ा।

दिवाली की शाम वृषभ लग्न ठीक प्रदोष काल के साथ आता है, इसलिए गृहस्थ परिवारों, किसानों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए यही समय सबसे उपयुक्त बताया गया है। जो लोग शाम को पूजा न कर पाएं, उनके लिए अमावस्या के दौरान बाकी स्थिर लग्न विकल्प हैं।

8 नवंबर को भोपाल में अमावस्या के दौरान स्थिर लग्न…

स्थिर लग्नसमय (भोपाल)किसके लिए उपयुक्त बताया गया
कुंभदोपहर 1:19 से 2:52 बजेकर्ज या कारोबार में घाटे से परेशान लोग
वृषभशाम 6:02 से 8:01 बजेगृहस्थ, किसान, नौकरीपेशा, व्यापारी
सिंहरात 12:30 से 2:42 बजे (तारीख 9 नवंबर)साधु-संत, तंत्र साधक
वृश्चिकसुबहइस बार सुबह अमावस्या नहीं, विकल्प नहीं

सुबह का वृश्चिक लग्न मंदिर, अस्पताल, स्कूल जैसे संस्थानों के लिए माना जाता है, पर इस साल 8 नवंबर की सुबह अमावस्या शुरू नहीं हुई होगी।

सवाल- निशीथ काल की पूजा का क्या महत्व है?

जवाब- निशीथ काल आधी रात का समय होता है। दिवाली की रात इसे महानिशीथ काल कहा जाता है। भोपाल में 8 नवंबर को यह रात 11:39 से 12:30 बजे तक, यानी 51 मिनट का है।

परंपरा में यह समय साधना, मंत्र जाप और काली पूजा का माना गया है। बंगाल, ओडिशा और असम में दिवाली की अमावस्या पर इसी निशीथ समय में काली पूजा होती है। 7 नवंबर की रात हनुमान पूजा का समय भी निशीथ काल यानी रात 11:39 से 12:30 बजे तक बताया गया है।

पंचांग गणना के स्रोत साफ कहते हैं कि महानिशीथ काल की लक्ष्मी पूजा तंत्र साधना करने वालों और इस विधि के जानकार पंडितों के लिए है। आम परिवारों के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न वाला शाम का मुहूर्त ही सुझाया गया है। कई परिवार शाम को पूजा के बाद रात में दीपक जलाए रखते हैं और श्रीसूक्त या लक्ष्मी स्तुति का पाठ करते हैं, यह परंपरा हर घर में अलग हो सकती है।

पंचांग गणना के स्रोत यह भी कहते हैं कि लक्ष्मी पूजा के लिए चौघड़िया मुहूर्त न चुनें, क्योंकि चौघड़िया मुख्य रूप से यात्रा के लिए देखा जाता है।

सवाल- दूसरे शहरों में लक्ष्मी पूजा का समय अलग होगा?

जवाब- हां। मुहूर्त सूर्यास्त और लग्न पर टिका होता है, इसलिए हर शहर में समय कुछ मिनट बदल जाता है। पंचांग गणना के अनुसार नई दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे, जयपुर में 6:03 से 7:59 बजे, अहमदाबाद में 6:22 से 8:20 बजे और मुंबई में 6:27 से 8:27 बजे तक मुहूर्त है। इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन का समय हम इस सीरीज की अलग खबर में देंगे।

सवाल- धनतेरस पर पूजा और यम दीपदान कब करें?

जवाब- धनतेरस 6 नवंबर शुक्रवार को है। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे तक रहेगी। भोपाल में धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम 6:10 से 8:08 बजे तक है। मान्यता के अनुसार इसी शाम घर के बाहर यम के नाम का दीया जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं।

सवाल- गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब हैं?

जवाब- गोवर्धन पूजा और अन्नकूट 10 नवंबर मंगलवार को है। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे से 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक है और प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 6:31 से 8:44 बजे तक है। भाई दूज 11 नवंबर बुधवार को है। भोपाल में तिलक का अपराह्न समय दोपहर 1:11 से 3:24 बजे तक है। इसी दिन कायस्थ समाज चित्रगुप्त पूजा करता है।

भाई दूज पर तिलक के लिए सजी पूजा की थाली
भाई दूज पर तिलक के लिए सजी पूजा की थाली फोटो साभार Wikimedia Commons / Khushboo Goel, CC BY-SA 4.0

तारीखें याद रखने के 5 आसान पॉइंट

  • 1. धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर, शाम को पूजा और यम दीपदान।
  • 2. काली चौदस और हनुमान पूजा शनिवार 7 नवंबर की रात।
  • 3. नरक चतुर्दशी की सुबह और लक्ष्मी पूजा की शाम, दोनों रविवार 8 नवंबर।
  • 4. गोवर्धन पूजा मंगलवार 10 नवंबर की सुबह।
  • 5. भाई दूज बुधवार 11 नवंबर की दोपहर।

पूजा की विधि, दीयों की संख्या और रीति रिवाज हर परिवार और इलाके में कुछ अलग होते हैं। अपने परिवार की परंपरा के हिसाब से ही पूजा करें।

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।

कुछ कॉमन सवाल जवाब

दिवाली 2026 की सही तारीख क्या है?

पंचांग गणना के अनुसार लक्ष्मी पूजा और दीपावली 8 नवंबर 2026, रविवार को है।

भोपाल में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

8 नवंबर को शाम 6:02 से 8:01 बजे तक, प्रदोष काल और वृषभ लग्न में।

धनतेरस 2026 कब है?

धनतेरस 6 नवंबर शुक्रवार को है, भोपाल में पूजा मुहूर्त शाम 6:10 से 8:08 बजे तक।

भाई दूज 2026 कब है?

भाई दूज 11 नवंबर बुधवार को है, तिलक का अपराह्न समय दोपहर 1:11 से 3:24 बजे तक।

दिवाली पर स्थिर लग्न में पूजा क्यों करते हैं?

मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा से लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं। 8 नवंबर को भोपाल में वृषभ लग्न शाम 6:02 से 8:01 बजे तक है।

निशीथ काल में लक्ष्मी पूजा किसे करनी चाहिए?

पंचांग गणना के स्रोत इसे साधकों और तंत्र विधि के जानकारों के लिए बताते हैं। भोपाल में महानिशीथ काल रात 11:39 से 12:30 बजे तक है।

स्रोत, पंचांग गणना (भोपाल)। मुख्य फोटो साभार Wikimedia Commons / humdingor, CC BY-SA 2.0। अन्य फोटो Wikimedia Commons, फ्री लाइसेंस।