राजस्थान के कई मारवाड़ी परिवारों में दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के साथ एक छोटी मिट्टी की मटकी की पूजा की परंपरा है। आम बोलचाल में इसे मटकी बांधना कहते हैं।

इस मटकी में सोने के छोटे मोती, गेहूं, सिक्के और कमलगट्टे रखकर उसे लाल कपड़े में बांधा जाता है और तिजोरी में रख दिया जाता है। हर साल दिवाली पर इसे निकालकर फिर से पूजा जाता है।

आज जानेंगे कि-

  • मटकी बांधने की परंपरा क्या है?
  • क्या इसका टोने-टोटके से कोई लेना-देना है?
  • परंपरा के अनुसार मटकी कैसे तैयार की जाती है?
लाल कपड़े और मौली से बंधी मटकी, सोने के मोती, चांदी के सिक्के और कमलगट्टे
लाल कपड़े और मौली से बंधी मटकी, सोने के मोती, चांदी के सिक्के और कमलगट्टे प्रतीकात्मक चित्र (AI)

सवाल- मटकी बांधना क्या है?

जवाब- यह मारवाड़ी परिवारों में चली आ रही एक पारिवारिक परंपरा है। ज्योतिष परंपरा से जुड़े लोग इसे गुरु से शिष्य तक पहुंचने वाला उपाय बताते हैं। इसमें मिट्टी की छोटी मटकी में धन और अन्न के प्रतीक रखकर उसकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह मटकी घर में धन-धान्य बनाए रखने की कामना का प्रतीक है।

सवाल- क्या मटकी बांधना टोना-टोटका है?

जवाब- मटकी बांधने का नाम सुनते ही कई लोग इसे काले जादू से जोड़ देते हैं, इसलिए इससे डरते भी हैं। इस परंपरा को मानने वाले कहते हैं कि यह धारणा गलत है और दिवाली पर यह सात्विक पूजा के रूप में की जाती है। ध्यान रखें, कोई इस नाम पर डराए या पैसे मांगे तो सावधान रहें। यह आस्था की बात है, इसके असर की कोई गारंटी नहीं होती।

सवाल- इसके पीछे मान्यता क्या है?

जवाब- भारतीय दर्शन में मनुष्य को सत्व, रज और तम, इन तीन गुणों से प्रभावित माना गया है। ज्योतिष परंपरा से जुड़े लोगों का मानना है कि अलग-अलग गुण वाली चीजें, जैसे अन्न, धातु और बीज, मंत्रों के साथ रखने से घर के माहौल पर असर पड़ता है। मंत्र और रत्न जैसे उपायों के पीछे भी यही सोच बताई जाती है। यह आस्था का विषय है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

लाल कपड़े से बंधी मटकी और मंगल कलश की पूजा
लाल कपड़े से बंधी मटकी और मंगल कलश की पूजा प्रतीकात्मक चित्र (AI)

सवाल- मटकी के लिए क्या सामग्री चाहिए?

जवाब- परंपरा में बताई गई सामग्री ये है…

सामग्रीक्या करें
छोटी मिट्टी की मटकीनई और बिना दरार वाली लें
मटकी के मुंह के आकार का दीयाढक्कन की तरह इस्तेमाल होता है
सिंदूर और हल्दीमटकी के अंदर लेप के लिए
सोने के छोटे मोतीसुनार के पास मिलते हैं, जितना संभव हो
गेहूं, कुछ सिक्के और कमलगट्टेमटकी के अंदर रखने के लिए
लाल कपड़ामटकी बांधने के लिए

सवाल- मटकी कैसे तैयार की जाती है?

जवाब- मारवाड़ी परिवारों में अपनाई जाने वाली विधि स्टेप में समझिए…

  • 1. एक छोटी मटकी और उसके मुंह के आकार का दीया लें।
  • 2. मटकी के अंदर पहले सिंदूर और फिर हल्दी का लेप लगाएं।
  • 3. मटकी में यथासंभव सोने के मोती, गेहूं, कुछ सिक्के और कमलगट्टे डालें।
  • 4. मटकी को तीन-चौथाई खाली रखें, यानी पूरी न भरें।
  • 5. लक्ष्मी पूजा के साथ मटकी की पूजा करें और उसे लाल कपड़े में बांध दें।
  • 6. मटकी को तिजोरी या घर की किसी सुरक्षित, गुप्त जगह पर रख दें।
मटकी भरने का नियम, परंपरा के अनुसार
तीन-चौथाई खाली
सामग्री सिर्फ एक-चौथाई हिस्से तक, बाकी जगह खाली
सिंदूर-हल्दी लगी मटकी में सोने के मोती, चांदी के सिक्के, कमलगट्टे और गेहूं
सिंदूर-हल्दी लगी मटकी में सोने के मोती, चांदी के सिक्के, कमलगट्टे और गेहूं प्रतीकात्मक चित्र (AI)

सवाल- हर साल दिवाली पर क्या किया जाता है?

जवाब- परंपरा के अनुसार हर दिवाली पर मटकी को तिजोरी से निकालकर उसकी पूजा की जाती है। फिर उसमें कुछ सोने के मोती या सिक्के और डाले जाते हैं और उसे वापस लाल कपड़े में बांधकर रख दिया जाता है। कई परिवारों में यह मटकी पीढ़ियों तक चलती है।

दिवाली की रात लाल कपड़े में बंधी मटकी तिजोरी में रखता परिवार
दिवाली की रात लाल कपड़े में बंधी मटकी तिजोरी में रखता परिवार प्रतीकात्मक चित्र (AI)

सवाल- पूजा में कौन सा पाठ किया जाता है?

जवाब- मटकी की पूजा के समय ऋग्वेद के श्रीसूक्त का पाठ करने की परंपरा है। पंचांग गणना के स्रोतों में भी दिवाली पूजा के बाद श्रीसूक्त और लक्ष्मीसूक्त का पाठ करने की बात कही गई है।

कमल के फल और बीज यानी कमलगट्टे
कमल के फल और बीज यानी कमलगट्टे फोटो साभार Wikimedia Commons / Basile Morin, CC BY 4.0

सवाल- मटकी की पूजा किस समय करें?

जवाब- मटकी की पूजा लक्ष्मी पूजा के साथ 8 नवंबर की शाम की जाती है। पंचांग गणना के अनुसार जयपुर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:03 से 7:59 बजे और भोपाल में शाम 6:02 से 8:01 बजे तक है।

मटकी की सामग्री और विधि हर परिवार में थोड़ी अलग हो सकती है। अपने परिवार के बड़ों की परंपरा के अनुसार ही पूजा करें।

दिवाली पर रोशनी से जगमगाता उदयपुर
दिवाली पर रोशनी से जगमगाता उदयपुर फोटो साभार Wikimedia Commons / Benjamin Vander Steen, CC BY 2.0
मटकी पूजा की तैयारी

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क्विज, मटकी की परंपरा कितना जानते हैं?

सवाल पढ़िए, जवाब सोचिए, फिर सवाल पर टैप करके सही जवाब देखिए…

1. मटकी के अंदर पहले किसका लेप लगाते हैं?

सही जवाब- पहले सिंदूर, फिर हल्दी।

2. मटकी कितनी खाली रखी जाती है?

सही जवाब- तीन-चौथाई।

3. मटकी को किस रंग के कपड़े में बांधते हैं?

सही जवाब- लाल कपड़े में।

4. मटकी की पूजा में कौन सा पाठ होता है?

सही जवाब- श्रीसूक्त।

क्या आपके परिवार में भी दिवाली पर मटकी बांधी जाती है? अपनी परंपरा बताइए

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यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, StateNews इसकी पुष्टि नहीं करता।

कुछ कॉमन सवाल जवाब

मारवाड़ी दिवाली में मटकी क्यों बांधते हैं?

परंपरा में इसे घर में धन-धान्य बनाए रखने की कामना का प्रतीक माना जाता है।

मटकी में क्या डालते हैं?

सोने के छोटे मोती, गेहूं, कुछ सिक्के और कमलगट्टे।

मटकी कहां रखते हैं?

लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या घर की सुरक्षित जगह पर।

क्या हर साल नई मटकी बनती है?

नहीं, परंपरा में उसी मटकी को हर दिवाली निकालकर पूजते हैं और कुछ मोती या सिक्के और डालते हैं।

स्रोत, राजस्थान के मारवाड़ी परिवारों में प्रचलित पूजा परंपरा की जानकारी, पंचांग गणना (Drik Panchang, जयपुर और भोपाल, लक्ष्मी पूजा 2026)। AI चित्र प्रतीकात्मक हैं। कमलगट्टे और उदयपुर की फोटो साभार Wikimedia Commons।