दुनिया भर में 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग' का मतलब होता है भविष्य के शहरों की शानदार रूपरेखा तैयार करना। लेकिन मध्य प्रदेश में यह विभाग मानो एक ऐसा 'जादुई चश्मा' बन गया है, जिसे पहनकर अधिकारियों को 7,981 अवैध कॉलोनियां दिखाई ही नहीं देतीं!
जब तक प्रशासन की नींद टूटती है, तब तक भू-माफिया कृषि भूमि पर कंक्रीट का जंगल खड़ा कर चुके होते हैं। आइए, आज मध्य प्रदेश के 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग' (TNCP) विभाग के कामकाज, उसके नियमों और जमीनी हकीकत का पूरा 'लेआउट' समझते हैं।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) मध्य प्रदेश सरकार का नोडल विभाग है। इसका कार्य शहर का फैलाव, आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र, और ग्रीन बेल्ट तय करना है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सड़क, पानी और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ सुरक्षित माहौल देना है।
MP Town and Country Planning Act, 1973:
यह कानून राज्य सरकार को 'प्लानिंग एरिया' घोषित करने की शक्ति देता है। बिना अनुमति के 'Land Use Change' या निर्माण करना पूरी तरह गैरकानूनी है।
राज्य स्तर पर मुखिया (भोपाल मुख्यालय)।
संभाग स्तर पर सबसे अहम। लेआउट अप्रूवल का अधिकार।
विकास प्राधिकरणों (IDA, BDA) के साथ मिलकर काम करने वाले।
कागजों पर मास्टर प्लान वर्ल्ड-क्लास होता है, लेकिन जमीन पर TNCP का रवैया 'री-एक्टिव' है। शहर बेतरतीब फैलने के बाद सर्वे होता है।
⚠️ FIR और जेल: नए कानून में 10 साल की जेल और 1 करोड़ तक जुर्माना।
⚠️ Demolition: अवैध निर्माण ढहाने का प्रावधान (जैसे भोपाल के खेजड़ा में कार्रवाई)।
⚠️ कम्पाउंडिंग: केवल छोटे उल्लंघनों के लिए, पूरी कॉलोनी के लिए नहीं।
"पूरे मध्य प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियां रातों-रात तो नहीं बस गईं। जब खेतों में जेसीबी चल रही होती है, तब जोनल अधिकारियों को यह क्यों नहीं दिखता?"
"238 अवैध कॉलोनियों के नाम रिकॉर्ड से हटा देना समस्या का समाधान है या भू-माफियाओं को बचाने की सरकारी साजिश?"
स्टेट न्यूज़ ए आई व्यू : TNCP आज सिर्फ रसूखदारों के नक्शे पास करने और गरीबों के आशियाने पर बुलडोज़र चलाने का मूक दर्शक है। जब तक 'सेटिंग' बंद नहीं होगी, शहर कंक्रीट के अवैध जंगलों में बदलते रहेंगे।
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